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रात को शिशा नहीं देखना चाहिए (सच्ची घटना पर आधारित)😱💀

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रात को शिशा नहीं देखना चाहिए     राहुल अल्मोड़ा, उत्तराखंड का रहने वाला था,  लेकिन मुंबई में रहकर एक कॉल सेंटर में काम करता था।  वह दोपहर 2:00 से रात 11:00  बजे  की शिफ्ट में काम करता था। ऑफिस का काम खत्म करने के बाद, लेट नाइट घर पहुंचना,लेट नाइट खाना खाना,लेट नाइट जागना उसकी आदत बन चुकी थी। लेकिन उस एक रात ने उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए कभी न खत्म होने वाले एक बुरे हादसे में बदल दिया। आखिर क्या थी वह घटना ? चलिए विस्तार से जानते हैं! दिसंबर का महीना था, हड्डी गला देने वाली ठंड पड़ रही थी।  राहुल रात 11:00 बजे कॉल सेंटर से अपना काम खत्म करके, अपने घर के लिए निकला।  घर पहुंचते पहुंचते उसे रात के 12:00 बज चुके थे।  पूरी सोसाइटी मैं सन्नाटा छाया हुआ था,  जैसे कि यहां कोई रहता ही ना हो। आज तो सोसाइटी का सिक्योरिटी गार्ड भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। शायद वह भी इस कड़कड़ाती ठंड में चादर ओढ़े कहीं कोने में सो रहा होगा। बर्फीली ठंडी हवा की सांय-सांय की आवाज कानों को छू रही थी। राहुल हथेलियों को रगड़ता हुआ, तेज कदमों से अपने फ्लैट पर पहुंचा...

खैट पर्वत का रहस्य: क्या बबीता पांडे को "आछरी" ले गई ?

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😱💀रहस्यमई खैट पर्वत: आछरियों की सच्ची और खौफनाक कहानी नैनीताल (रामनगर) की रहने वाली 24 साल की MBA छात्रा बबीता पांडे उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से 29 मई 2026 की रात से रहस्यमयी तरीके से लापता है । प्रशासन की भारी भरकम टीमों (SDRF, NDRF, ITBP, सेना, ड्रोन और स्निफर डॉग्स) द्वारा एक महीने से ज्यादा समय तक चले बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लेकिन स्थानीय लोगों में एक सुदबुदाहट है। वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि उसे ' आछरी ' ले गई टिहरी के ही बगड़ गांव से जहां जीतू नाम का एक नौजवान लड़का रहता था। जीतू अपनी बहन सोबनी को लेने उसके ससुराल जा रहा था। रास्ते में वही रहस्यमय और डरावना खैट पर्वत पड़ता था। दोपहर का वक्त था चारों तरफ सन्नाटा था, जीतू थक्कर एक बड़े पत्थर पर बैठ गया। जीतू अपने पास बांसुरी रखता था, उस टाइम समय बिताने के लिए बांसुरी वगैरा ही टाइम पास के साधन हुआ करते थे।  उसने अपनी जेब से बांसुरी निकाली और और बजाने लगा । और जीतू भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। कहते हैं उसे भी " आछरी " ...

😱बेगुनकोडर:भूतिया रेलवे स्टेशन [सच्ची घटना पर आधारित]

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रेलवे के रिकॉर्ड में दर्ज भूतिया रेलवे स्टेशन बेगुनकोडर 😱 भारत के भूतिया रेलवे स्टेशनों की बात हो और उसमें बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन का नाम ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता... जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं भारत के पश्चिम बंगाल के पुरलिया जिले में स्थित बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन के बारे में... जहां 42 सालों तक एक भूतिया लड़की के खोफ से सन्नाटा पसरा रहा... तो चलिए शुरू करते हैं सच्ची घटना पर आधारित एक खौफनाक रोंगटे खड़े कर देने वाली एक सच्ची कहानी... - - - - - - - - - - - - - - - - - - - जब बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन नहीं था तो वहां के स्थानीय लोगों को 40-50 किलोमीटर दूर जाकर  आने-जाने का साधन पकड़ना पड़ता था...  जो उनके लिए बहुत परेशानी भरा और खर्चीला था... स्थानीय लोगों की मांग के बाद.... 1960 में संथाल की रानी लोचन कुमारी और रेलवे के प्रयासों से बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन बनकर तैयार होता है... बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन के बनने से अब लोगों को 40-50 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता था... अब उनके आने जाने के लिए बेगुनकोडर रेलवे स्टेशन से ही ट्रेन उपलब्ध थी... जो उनके लिए बहुत सस्ता और सुलभ होता था....

दो ऐसी सच्ची घटनाएं जिन्हें पढ़कर आपकी नींद उड़ जाएगी😱

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                                        मेरी पत्नी 😱 यह कहानी आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के सुनील शर्मा की है रात के 10:00 बज चुके थे...सुनील सोने की तैयारी कर रहा था...तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक होती है...खट...खट... खट... डोर बेल होने के बावजूद कोई हाथ से दरवाजा जोरों से पीट रहा था... सुनील ने जल्दी से दरवाजा खोला और देखा तो दरवाजे पर उसकी पत्नी खड़ी थी... सुनील उसे देखकर आश्चर्य में पड़ गया क्योंकि वह तो आज सुबह ही अपने मायके के लिए निकली थी... और वह एक महीने बाद आने वाली थी, तो इस समय अचानक रात में कैसे आ सकती है... अरे प्रिया तुम...पर तुम तो एक महीने बाद आने वाली थी...तो इतनी रात में अचानक कैसे आ गयी--सुनील ने उससे पूछा... उसने सुनील की बात का कोई उत्तर नहीं दिया और धीरे-धीरे कदमों से अंदर की ओर कमरे की तरफ बढ़ने लगी... उसका बर्ताव सुनील को थोड़ा अजीब लगा लेकिन उसने सोचा कि वह शायद थकी हुई है है... वह कमरे में जाकर लेट गई और सो गई। सुनील ने भी उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा और वह भी सो ...

आखरी कॉल😱 (एक छोटी सी कहानी)

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प्रियंका रात के 12:00 बजे अपने ऑफिस से घर लौट रही थी। अगस्त का महीना था, हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रियंका अपनी मस्ती में गाना गुनगुनाते हुए गाड़ी चला रही थी। तभी उसके फोन की घंटी बजती है। यह फोन उसके पापा का था। 2 मिनट तक तो फोन से कोई आवाज नहीं आती है, और प्रियंका हेलो हेलो पापा आप कुछ बोल क्यूं नही रहे, हैलो पापा हैलो, तभी 2 मिनट बाद उसके पापा रोते हुए घबराई आवाज में बोलते हैं। प्रियंका बेटी प्रियंका बेटी घर मत आना, यहां कोई तुम्हारे कमरे में तुम्हारी शक्ल लिए बैठा हुआ है। यह सुनते ही प्रियंका के होश उड़ जाते हैं। प्रियंका ने डरते हुए पूछा पापा, पापा आप यह क्या कह रहे हो, तभी दूसरी तरफ से उसके पापा की आवाज अचानक बदल जाती है, और वह एक भयानक सी हंसी हंसने लगते हैं।  प्रियंका को महसूस होता है कि यह हसी की आवाज फोन में से नहीं बल्कि सीट के पीछे से आ रही है, और जैसे ही प्रियंका मुड़कर पीछे देखती है, उसके चेहरे का तो रंग ही उड़ जाता है। क्योंकि सीट पर कोई और नहीं बल्कि उसके पापा ही बैठे हुए थे, जो एक अजीब सी स्माइल करते हुए प्रियंका को ...

किराएदार (रूह कपा देने वाली एक सच्ची घटना)☠️💀

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    मेरा नाम प्रियंका है । यह कहानी मेरे बटे सतीश की है , जो महज 25 साल का था । मैं और मेरा बेटा सतीश लखनऊ में रहते थे । मेरे पति 8 साल पहले सड़क दुर्घटना में चल बसे थे । मैं और मेरा बेटा सतीश बहुत हंसी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे । सतीश बहुत हंस-मुख और चंचल स्वभाव का लड़का था । वह सब का प्यार था आस-पड़ोस सभी उसे बहुत प्यार करते थे , करते भी क्यों ना वह था ही ऐसा ।   एक दिन 18 जनवरी 2026 को हमारे घर पोस्ट ऑफिस से एक डाक आई , सतीश ने डाक को खोल कर देखा और उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा । वह कोई डाक नहीं बल्कि मेरे बेटे का जोइनिंग लेटर था । सतीश की एसबीआई बैंक में पीओ की पोस्ट पर नौकरी लगने का जोइनिंग लेटर था , लेकिन उसे जॉइनिंग दिल्ली में करनी थी । मैं सतीश की नौकरी लगने से बेहद खुश थी , लेकिन एक गम भी था कि मेरा बेटा अब मुझसे दूर दिल्ली चला जाएगा । यह सोचकर मेरी आंखों से आंसू आ गए , लेकिन सतीश ने मुझे समझाया और बोला की मां चिंता मत करो मैं आता जाता रहूंगा और ठीक से सेटल होने के बाद तुम्हें भी फिर वही अपने साथ रहने के लिए दिल्ली ले जाऊंगा ।   अगले ही दिन सतीश दिल्ली क...

शिवरात्री की वो भयानक रात☠️💀

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यह बात शिवरात्रि (15 फरवरी 2026, दिन:रविवार) की है । मेरा घर पहाड़ी इलाके सोनभद्र में स्थित है । मेरे घर से 1 किलोमीटर दूरी पर पहाड़ी पर एक बहुत पुराना भोले बाबा का गुफा मंदिर है, पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह बहुत वीराना रहता है ।पहाड़ी पर मंदिर के एक दो पुजारी के अलावा यहां कोई नहीं रहता, इक्का दुक्का लोग कभी कभार यहां दर्शन करने आ जाते हैं । लेकिन शिवरात्रि के दिन यहां हजारों भक्त मंदिर में भोले बाबा को जल चढ़ाने आते हैं ।  उस दिन (शिवरात्रि के दिन) सुबह 7:00 बजे मुझे बनारस निकलना था । इसलिए मैंने सोचा सुबह 4:00 बजे ही में मंदिर में जल चढ़ा आऊंगा क्योंकि सुबह 6:00 बजते ही वहां हजारों लोगों की भीड़ लगना शुरू हो जाएगी , और मुझे बनारस निकलने में बहुत देर हो जाएगी ।इसलिए मैं उस दिन 3:00 बजे उठकर नहा धोकर तैयार होकर लोटे में जल लेकर 4:00 बजे सुबह  मंदिर के लिए निकल गया । पहाड़ी पर होने के कारण रास्ता जंगल से होते हुए जाता है । जाड़ों की सुबह 4:00 बजे तो सड़के भी वीरान पड़ी रहती हैं तो पहाड़ी की ओर जाने वाली जंगली रास्ते पर तो कौन ही दिखेगा । रास्ता एकदम सुनसान था भयानक का...