मेरा नाम प्रियंका है । यह कहानी मेरे बटे सतीश की है , जो महज 25 साल का था । मैं और मेरा बेटा सतीश लखनऊ में रहते थे । मेरे पति 8 साल पहले सड़क दुर्घटना में चल बसे थे । मैं और मेरा बेटा सतीश बहुत हंसी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे । सतीश बहुत हंस-मुख और चंचल स्वभाव का लड़का था । वह सब का प्यार था आस-पड़ोस सभी उसे बहुत प्यार करते थे , करते भी क्यों ना वह था ही ऐसा ।
एक दिन 18 जनवरी 2026 को हमारे घर पोस्ट ऑफिस से एक डाक आई , सतीश ने डाक को खोल कर देखा और उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा । वह कोई डाक नहीं बल्कि मेरे बेटे का जोइनिंग लेटर था । सतीश की एसबीआई बैंक में पीओ की पोस्ट पर नौकरी लगने का जोइनिंग लेटर था , लेकिन उसे जॉइनिंग दिल्ली में करनी थी । मैं सतीश की नौकरी लगने से बेहद खुश थी , लेकिन एक गम भी था कि मेरा बेटा अब मुझसे दूर दिल्ली चला जाएगा । यह सोचकर मेरी आंखों से आंसू आ गए , लेकिन सतीश ने मुझे समझाया और बोला की मां चिंता मत करो मैं आता जाता रहूंगा और ठीक से सेटल होने के बाद तुम्हें भी फिर वही अपने साथ रहने के लिए दिल्ली ले जाऊंगा ।
अगले ही दिन सतीश दिल्ली के लिए रवाना हो गया , और सीधा अपने ऑफिस पहुंचकर नौकरी ज्वाइन कर ली , लेकिन उसे रहने के लिए किराए पर कमरा चाहिए था , क्योंकि होटल में कितने दिन रहता । तीन-चार दिन के बाद बहुत खोजने पर उसे शहर से थोड़ा बाहर आउटर में जो कि थोड़ा शांत इलाका था उधर लोगों का आना-जाना काम ही था , लेकिन सतीश को ऐसा ही शांत जगह घर चाहिए भी था , वह घर बहुत बड़ा था हवेली की तरह । सतीश ने उस हवेली के मेंन गेट को पार कर उस हवेली के अंदर गया , तो उसे एक 70 साल की बुढ़िया मिली ।
उस हवेली नुमा घर में अकेले वह 70 साल की बुढ़िया जो की मकान मालकिन थी केवल वही रहती थी । सतीश को थोड़ा आश्चर्य तो हुआ कि इतने बड़े घर में भला कोई अकेले तो भी एक बुढ़िया रहती है लेकिन उसने इस बात को अनदेखा कर दिया , क्योंकि घर बहुत सुंदर था । सतीश ने उससे किराए पर रहने के लिए एक कमरा मांगा । बुढ़िया ने तुरुत हां कर दीया और किराया भी बहुत कम था , तो सतीश को भी यह सही लगा । बुढ़िया बात करने में व्यवहार में बहुत अच्छी थी । वह सतीश को बेटा ही कहती थी । सब कुछ 5-6 दिन तक सही रहा । सतीश की मुझेसे फोन पर बात होती रहती थी , वह बताता वह वहां बहुत खुश है , किसी चीज की कोई दिक्कत नहीं है । और नौकरी भी बहुत अच्छी चल रही है ।
लेकिन एक दिन अमावस की रात थी । रात बहुत गहरी अंधेरी थी । उस दिन थोड़ी धीमी-धीमी बरसात भी हो रही थी । बाहर कुत्तों के रोने की आवाज़ आ रही थी । उस दिन सतीश को कमरे में थोड़ा अजीब सा लग रहा था । उसने सोचा थोड़ा कमरे से निकलकर बरामदे में टहल लेता हूं । वह जब बरामदे में टहलने निकला तो उसने देखा की हवेली जैसी सुंदर थी वैसी ना थी , बल्कि एक पुराना खंडहर , चारों तरफ मकड़ी के बड़े-बड़े जाले , टूटी फूटी दीवारें , ऐसा मानो सालों से वहां कोई आया ही ना हो सालों से यह घर बंद पड़ा हो और खंडहर हो गया हो ।
सतीश यह देखकर बहुत डर गया उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या यह वही हवेली है , जहां वह किराए पर रहने आया था । वह तो बहुत सुंदर महल जैसी थी यह तोकोई पुराना खंडहर है , तभी उसने देखा कि वह बुढ़िया नीचे की ओर एक कोने में अपने पूरे कपड़े उतारकर लम्बे-लम्बे बाल जो जमीन को छू रहे थे बाल खुले हुए अपने चारों तरफ मामबत्तियां जलाए हुए बैठी है । और वह वैसी बिल्कुल नहीं लग रही थी जैसी वह थी । उसके शरीर से चारों तरफ से खून निकल रहा था । और वह अजीब सी कर्कश आवाज में पता नहीं किस भाषा में कुछ बोल रही थी । यह सब देख सतीश बहुत घबराने लगा डर के मारे सतीश का बुरा हाल था । सतीश ने अपनी लड़खड़ाती आवाज में उसे आवाज दी आंटी आंटी यह सब क्या है ।
तभी बैठे-बैठे बिना शरीर को घुमाए उसने बस अपनी गर्दन घुमाई सतीश कि उसे देखते ही चीख निकल गई वह एक डायन थी । बड़े-बड़े दांत , बड़ी-बड़ी सफेद आंखें , आग से जला हुआ चेहरा , और वह सतीश को देखकर जोर-जोर से हंसने लगी । सतीश चीखते चिल्लाते हुए अपने कमरे की तरफ भागा , लेकिन वहां तो कोई कमरा था ही नही , वह तो टूटी फूटी दीवारों का खंडहर था । वह डायन उठ कर जोर-जोर से हंसते हुए सतीश की तरफ बढ़ने लगी । सतीश चीखते चिल्लाते हुए इधर-उधर भाग रहा था । उसने अपनी जेब से फोन निकाला और अपनी चीखती चिल्लाती लड़खड़ाती आवाज में उसने मुझे (अपनी मां को) फोन लगाया और सारी बात जल्दी-जल्दी बताइ । मैं बहुत घबरा गयी ।
वहां में किसी को नहीं जानती थी । इसलिए मैं तुरंत गाड़ी पकड़ कर दिल्ली के लिए रवाना हो गई । और सीधापुलिस को लेकर वहां पहुंची । लेकिन मुझे पहुंचे में शायद देर हो चुकी थी । वहां पहुंचकर देखा तो वहां सतीश का केवल एक बैग और मोबाइल मिला । पूछताछ करने पर वहां के लोगों ने बताया कि , यह हवेली तो 100 सालों से बंद पड़ी है । लोगों ने बताया कि यहां कभी राजा रानी हुआ करते थे राजा रानी बहुत से लोग रहते थे । रानी बूढी हो चुकी थी । लेकिन उसे जवान रहने का लालच था । उसे किसी ने बताया कि जवान बने रहने के लिए उसे जिंदा इंसानों का खून पीना होगा । धीरे धीरे उसने अपने रिश्तेदारों यहां तक की अपने पती को ही मार कर उनका खून पीया करती थी । धीरे-धीरे उस घर में कोई जिंदा न बचा और वह बुढ़िया भी एक दिन मर गई । तब से आज भी वह बुढ़िया जवान रहने के लिए भटकती है और किसी न किसी को अपना शिकार बनती है
मेरा बेटा आज भी मेरे सपने में आता है और मां मुझे बचा लो की गूहार लगता है ।



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