रात को शिशा नहीं देखना चाहिए (सच्ची घटना पर आधारित)😱💀

रात को शीशा नहीं देखना चाहिए, भूतिया कहानी
रात को शिशा नहीं देखना चाहिए
   
राहुल अल्मोड़ा, उत्तराखंड का रहने वाला था, लेकिन मुंबई में रहकर एक कॉल सेंटर में काम करता था। वह दोपहर 2:00 से रात 11:00 बजे की शिफ्ट में काम करता था।ऑफिस का काम खत्म करने के बाद, लेट नाइट घर पहुंचना,लेट नाइट खाना खाना,लेट नाइट जागना उसकी आदत बन चुकी थी।

लेकिन उस एक रात ने उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए कभी न खत्म होने वाले एक बुरे हादसे में बदल दिया। आखिर क्या थी वह घटना ? चलिए विस्तार से जानते हैं!

दिसंबर का महीना था, हड्डी गला देने वाली ठंड पड़ रही थी। राहुल रात 11:00 बजे कॉल सेंटर से अपना काम खत्म करके, अपने घर के लिए निकला। घर पहुंचते पहुंचते उसे रात के 12:00 बज चुके थे। 

पूरी सोसाइटी मैं सन्नाटा छाया हुआ था, जैसे कि यहां कोई रहता ही ना हो। आज तो सोसाइटी का सिक्योरिटी गार्ड भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। शायद वह भी इस कड़कड़ाती ठंड में चादर ओढ़े कहीं कोने में सो रहा होगा। बर्फीली ठंडी हवा की सांय-सांय की आवाज कानों को छू रही थी।

राहुल हथेलियों को रगड़ता हुआ, तेज कदमों से अपने फ्लैट पर पहुंचा, और जल्दी से फ्लैट का दरवाजा खोला, और अंदर गया। बाहर कुत्तों की रोने की हल्की-हल्की आवाज आ रही थी। राहुल ने जूते-मोजे उतारे, अपने कपड़े बदले और कुछ देर के लिए सोफे पर बैठ गया, क्योंकि 8-9 घंटे की शिफ्ट के बाद राहुल बहुत थक जाता था। 

सोफे पर बैठे-बैठे उसने सोचा अब बाथरूम जाकर थोड़ा मुंह हाथ धो लेता हूं, ताकि फ्रेश महसूस हो और फिर उसके बाद खाना खाऊंगा।राहुल खाना दोपहर में ही बना लेता था, और रात में आकर बस उसे गर्म करके खाना होता था। 

राहुल सोफे से उठता है और उठकर बाथरूम जाता है। बाथरूम उसके रूम से ही अटैच था। बाथरूम में मुंह हाथ धोने के लिए एक बेसिन था और बेसिन के ऊपर एक बड़ा सा शिशा भी लगा हुआ था। बाथरूम की लाइट थोड़ी टिमटिमा रही थी, मानो उस बल्ब का भी दम निकालने वाला हो। 

राहुल ने नल खोला और ठंडे पानी के छीटे अपने मुंह पर मारे, और अपना चेहरा बेसिन के ऊपर लगे शीशे में देखा, शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल था। शीशे में उसकी खुद की थकी हुई शक्ल दिख रही थी। लेकिन जैसे ही राहुल ने अपना चेहरा पौछने के लिए तोलिया उठाया, उसे लगा कि कुछ अजीब हुआ, शीशे के अंदर जो उसका अक्स(Reflection) दिख रहा था। उसने तोलिया उठाने में एक सेकंड की देरी की। 

राहुल को लगा कि शायद थकान की वजह से उसे कोई भ्रम(Hallucination) हुआ है। उसने अपना सिर झटका और बाथरूम की लाइट और दरवाजा बंद करके अपने कमरे में आ गया।राहुल ने किचन से खाना लिया और खाना खाने के लिए टीवी ऑन करके अपनी मेज पर बैठ गया।

राहुल खाना तो खा रहा था लेकिन उसका दिमाग उसी शीशे वाली घटना में अटका हुआ था। राहुल ने अपना खाना खत्म किया और किचन में बर्तन धोके, किचन क्लीन करके, अब वह सोने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसका मन बाथरूम के शीशे वाली घटना में ही अटका हुआ था। 

राहुल अपने इस ब्रह्म को दूर करने के लिए एक बार फिर बाथरूम जाता है और हिम्मत जूटाकर जान बूझकर शीशे के सामने जाकर खड़ा हो जाता है। उसने शीशे में अपने आपको देखा। सब कुछ शांत और नॉर्मल था। राहुल ने सोचा, कि वह फालतू में ही, तरह-तरह की बातें सोच रहा था। राहुल ने अब राहत की सांस ली, लेकिन जैसे ही वह मुड़कर जाने लगा, उसकी धड़कने वहीं थम गई।

क्योंकि शीशे के अंदर जो राहुल खड़ा था। वह नहीं मुड़ा। वह अभी भी वहीं खड़ा सीधे बाहर देख रहा था। अब राहुल का पूरा शरीर डर के मारे सुन पड़ गया। उसके माथे पर कड़कड़ाती ठंड की रात में भी पसीने की बूंदे चमकने लगी, बल्कि शीशे के अंदर वाले राहुल के चेहरे पर एक डरावनी, चौड़ी और भयानक मुस्कान उभर आई। 

वह मुस्कान किसी आम इंसान की हो ही नहीं सकती थी। उसके होठ कान तक खींचें जा रहे थे। यह देख कर राहुल का शरीर थर-थर कांपने लगा। राहुल के गले से आवाज तक नहीं निकल रही थी।

वह पीछे हटने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसके पर जैसे जमीन से चिपक चुके थे, तभी शीशे के अंदर की परछाई ने धीरे से अपना हाथ कांच पर रखा, हैरान करने वाली बात यह थी कि शीशे के अंदर से कांच पर उंगलियों के घिसने की असली आवाज आई ' चर्रर्र... चर्रर्र...'।

इसके बाद जो हुआ वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी था। शीशे के अंदर वाले राहुल ने अपनी गर्दन को अजीब तरीके से एक तरफ झुकाया। उसकी हड्डियों के चटकने की कट-कट की आवाज बाथरूम में गूंज उठी।

फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकाली, जो आम इंसानों की जीभ से दोगुनी लंबी और काले रंग की थी। यह सब देखकर राहुल बहुत बुरी तरह डर गया। उसकी धड़कने बहुत तेज हो गई। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपने पैर खिंचें और बाथरूम से बाहर भागा और झट से दरवाजा बंद किया। 

वह सीधा अपने घर में बने छोटे से मंदिर की तरफ भागा और जल्दी से हनुमान चालीसा उठाकर मंदिर में दिया जलाकर हनुमान जी की मूर्ती के सामने जोर- जोर से हनुमान चालीसा का पाठ करने लगा। उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था, मानो छाती चीर कर बाहर आ जाएगा।

वह पूरी रात हनुमान चालीसा का पाठ करता रहा। उसे पूरी रात ऐसा महसूस होता रहा, जैसे बाथरूम के दरवाजे के पीछे कोई खड़ा है और कुंडी को धीरे-धीरे हिला रहा है, लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ करते-करते राहुल को सुबह हो गई, और सुबह की पहली किरण के साथ जब धूप कमरे में आई, तब जाकर राहुल की जान में जान आई। 

उसने सबसे पहले अपने कमरे के खिड़की दरवाजे सब खोल दिए, और जल्दी से अपने मकान मालिक को फोन किया, और मकान मालिक को बिना कुछ बताए, उसी दिन शाम तक वह कमरा खाली कर दिया।

आज इस बात को 10 साल बीत चुके हैं। राहुल अब दूसरे इलाके में एक नए फ्लैट में रहता है। वह अब बिल्कुल ठीक है लेकिन आज भी, वह चाहे कितनी भी जल्दी में क्यों ना हो, रात के 12:00 बजे के बाद अपने घर के किसी भी शीशे के सामने नहीं जाता। यहां तक कि उसने अपने बेडरूम के अलमारी के शीशे पर भी एक काला कपड़ा डाल रखा है।

अगर आप भी या कहानी रात को अपने कमरे में अकेले बैठकर/लेटकर पढ़ रहे हैं, तो मेरी एक सलाह मानिए, गलती से भी अभी उठकर शीशे के सामने बिल्कुल मत जाना। क्योंकि क्या पता आपकी परछाई, आपका ही इंतजार कर रही हो। 😱

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Real Horror Stories In Hindi











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