प्रियंका रात के 12:00 बजे अपने ऑफिस से घर लौट रही थी। अगस्त का महीना था, हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बारिश की वजह से सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रियंका अपनी मस्ती में गाना गुनगुनाते हुए गाड़ी चला रही थी। तभी उसके फोन की घंटी बजती है। यह फोन उसके पापा का था। 2 मिनट तक तो फोन से कोई आवाज नहीं आती है, और प्रियंका हेलो हेलो पापा आप कुछ बोल क्यूं नही रहे, हैलो पापा हैलो, तभी 2 मिनट बाद उसके पापा रोते हुए घबराई आवाज में बोलते हैं।
प्रियंका बेटी प्रियंका बेटी घर मत आना, यहां कोई तुम्हारे कमरे में तुम्हारी शक्ल लिए बैठा हुआ है। यह सुनते ही प्रियंका के होश उड़ जाते हैं। प्रियंका ने डरते हुए पूछा पापा, पापा आप यह क्या कह रहे हो, तभी दूसरी तरफ से उसके पापा की आवाज अचानक बदल जाती है, और वह एक भयानक सी हंसी हंसने लगते हैं।
प्रियंका को महसूस होता है कि यह हसी की आवाज फोन में से नहीं बल्कि सीट के पीछे से आ रही है, और जैसे ही प्रियंका मुड़कर पीछे देखती है, उसके चेहरे का तो रंग ही उड़ जाता है। क्योंकि सीट पर कोई और नहीं बल्कि उसके पापा ही बैठे हुए थे, जो एक अजीब सी स्माइल करते हुए प्रियंका को ही देख रहे थे। वह प्रियंका का फोन काटते हैं और बोलते हैं, यहाँ नेटवर्क कितना अच्छा है ना।
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