मेरी पत्नी 😱
यह कहानी आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के सुनील शर्मा की है
रात के 10:00 बज चुके थे...सुनील सोने की तैयारी कर रहा था...तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक होती है...खट...खट... खट...
डोर बेल होने के बावजूद कोई हाथ से दरवाजा जोरों से पीट रहा था...
सुनील ने जल्दी से दरवाजा खोला और देखा तो दरवाजे पर उसकी पत्नी खड़ी थी...
सुनील उसे देखकर आश्चर्य में पड़ गया क्योंकि वह तो आज सुबह ही अपने मायके के लिए निकली थी... और वह एक महीने बाद आने वाली थी, तो इस समय अचानक रात में कैसे आ सकती है...
अरे प्रिया तुम...पर तुम तो एक महीने बाद आने वाली थी...तो इतनी रात में अचानक कैसे आ गयी--सुनील ने उससे पूछा...
उसने सुनील की बात का कोई उत्तर नहीं दिया और धीरे-धीरे कदमों से अंदर की ओर कमरे की तरफ बढ़ने लगी...
उसका बर्ताव सुनील को थोड़ा अजीब लगा लेकिन उसने सोचा कि वह शायद थकी हुई है है...
वह कमरे में जाकर लेट गई और सो गई। सुनील ने भी उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा और वह भी सो गया...
आधी रात को 1:00 बजे अचानक सुनील की नींद खुलती है और वह देखता है की प्रिया उसके बगल में नहीं है...
उसने घर में इधर-उधर देखा प्रिया कहीं नहीं थी... तभी उसने देखा कि किचन की लाइट जल रही है...और किचन की तरफ से जैसे कोई कुछ खा रहा हो ऐसी आवाज आ रही है...सुनील किचन की तरफ बढ़ा और किचन का नजारा देखते ही उसके होस उड़ गए...
उसने देखा कि, प्रिया एक बिल्ली को मार कर और दांतों से चीर फाड़ कर उसे खा रही है... चप-चप की आवाज पूरे किचन में गूंज रही थी...उसका मुंह खून से पूरी तरह सना हुआ था और उसकी आंखें पूरी सफेद थी ...उसके पैर पीछे को मुड़े हुए थे...
यह देखकर सुनील थरथर कांपने लगा...वह भागना चाह रहा था पर उसके पर मानो जम से गए हो...
क्योंकि वह समझ गया था... कि यह प्रिया नहीं बल्कि यह तो कोई डायन है...
उसके बाद क्या हुआ... किसी को कुछ नहीं पता... बस पता है तो इतना... कि सुनील अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है... और वह आज पागलखाने में भर्ती है... और जब प्रिया उससे मिलने जाती है... तो वह उसे देखकर बुरी तरह चीखने लगता है।
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आखिरी टैक्सी😱
यह कहानी मुंबई के श्याम सिंह की है।
श्याम मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था... श्याम बहुत कर्मठ लड़का था...
वह अपना काम बहुत मेहनत और लगन से करता था...कंपनी भी उसके काम से खुश थी... इसलिए कंपनी ने कुछ दिन के लिए उसे नैनीताल काम के सिलसिले में भेजने का फैसला किया...
श्याम भी बहुत खुश था...क्योंकि दिसंबर का महीना था और कड़ाके की ठंड पड़ रही थी...और नैनीताल जैसी जगह में इस महीने में रहने और घूमने का मजा ही कुछ और था...तो श्याम बहुत खुश था...और अगले ही दिन श्याम फ्लाइट से नैनीताल के लिए निकल गया...
नैनीताल पहुंचने के बाद श्याम कंपनी द्वारा बुक किए गए होटल में रुका...
होटल बहुत ही शानदार और खूबसूरत था...उसे वहां से कंपनी के ऑफिस जाना था...तो वह एक कैब करके ऑफिस के लिए निकल गया...
ऑफिस शहर से कुछ दूर आउट में था...श्याम ने ऑफिस पहुंच कर अपना काम करना शुरू किया...काम करते-करते श्याम को रात के 11:15 बज चुके थे और ऑफिस के सब लोग 10:00 बजे तक ही अपने-अपने घर जा चुके थे...
श्याम भी काम खत्म करके 11:15 बजे ऑफिस से निकल गया...
वह सोच रहा था कि आज तो वह कहीं घूमने भी नहीं जा पाया...और अब रात भी ज्यादा हो गई है तो उसने अब अपने होटल जहां पर वह रुका था जाने का फैसला किया...
जैसा कि ऑफिस शहर से आउट में था... तो सड़क पर सन्नाटा पसर चुका था...और कोहरा भी इतना घना था कि एक हाथ दूर तक का भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था...
श्याम को अपने होटल जाने के लिए कोई टैक्सी भी नहीं दिख रही थी...तो उसने सोचा एक कैब बुक कर लेता हू... लेकिन मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं था...
क्योंकि शहर से दूर आउट में मोबाइल में नेटवर्क अक्सर नहीं रहते हैं...
श्याम को वीरान सड़क पर खड़े हुए आधा घंटा बीत चुका था...कोई भी टैक्सी या ऑटो उसे नहीं दिख रहा था...
लेकिन तभी काफी देर इंतजार करने के बाद अचानक एक सफेद रंग की पुरानी टैक्सी जो बड़ी अजीब सी दिख रही थी... उसके पास आकर रूकती है...
टैक्सी के शीशे पूरी तरह ओस से भीगे हुए थे...अंदर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था...
ड्राइवर ने टैक्सी का शीशा नीचे किया...उसने एक ऊनी मफलर से अपना आधा चेहरा ढका हुआ था...और सर पर एक ऊनी टोपी पहनी हुई थी...ड्राइवर ने एक धीमी सी और भारी आवाज में पूछा...कहां जाना है बाबूजी...
श्याम ने कहा तल्लीताल ले चलोगे...बहुत ठंड है यार...और बहुत देर से खड़ा हूं...अब जाकर एक टैक्सी दिखी है...
ड्राइवर ने बिना कुछ बोले बस हां में सर हिलाया...और पीछे का दरवाजा खोलने का इशारा किया...श्याम गाड़ी की पिछली सीट पर जाकर बैठ गया... गाड़ी के अंदर एक अजीब सी सीलन थी...और गाड़ी में अजीब सी दुर्गंध भी आ रही थी...
श्याम ने ऐसे ही बात शुरू करने के लिए कहा...भाई साहब आज तो बहुत ज्यादा ठंड है...और कोहरा भी है... इस कोहरे में गाड़ी कैसे चला लेते हो... वह भी इतनी रात में...ड्राइवर ने श्याम की बात का कोई जवाब नहीं दिया...उसने बस चुपचाप स्टेरिंग थामें रखा...और गाड़ी उस सुनसान सड़क पर आगे बढ़ा दी...
श्याम ने मजाकिया अंदाज में कहा भाई साहब लगता है आप बातें काम करते हैं...
श्याम की नजर ड्राइवर के सामने लगे फ्रंट मिरर (पीछे दिखने वाले शीशे) पर पड़ी...
कोहरे की वजह से गाड़ी के अंदर की पीली लाइट जल रही थी...श्याम ने मिरर में ध्यान से देखा...शीशे में सिर्फ गाड़ी की पिछली सीट दिख रही थी...जिस पर वह खुद बैठा हुआ था...आगे की सीट पर कोई नहीं था...स्टेरिंग अपने आप घूम रहा था...
लेकिन ड्राइवर उसके सामने बैठ गाड़ी चला रहा था...
श्याम ने फिर शीशे में देखा उसे ड्राइवर नहीं दिख रहा था...उसे बस पीछे की सीट पर वह खुद बैठा दिख रहा था...
श्याम ने थोड़ा दिमाग लगाते हुए अपना मोबाइल निकाला...और उसका कैमरा ऑन करके ड्राइवर को कमरे में देखना चाहा...
लेकिन उसे कैमरे में वही नजारा दिखाई दिया...जो शीशे में दिखाई दे रहा था...ड्राइवर कैमरे में नहीं दिख रहा था...और गाड़ी का स्टेरिंग अपने आप चल रहा था...
श्याम के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए...उसका दिल इतनी जोर से धड़कने लगा कि उसे अपनी ही सांसों की आवाज सुनाई देने लगी... उसने दरवाजे का लॉक खोलने की कोशिश की... लेकिन लॉक नहीं खुल रहा था..
श्याम लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला...भाई गाड़ी रोको... मुझे यही उतरना है...श्याम चिल्लाया...
लेकिन गाड़ी नहीं रुकती है...तभी गाड़ी में उसे एक हंसी की आवाज आती है... ड्राइवर ने धीरे से अपना सर पीछे की तरफ घुमाया... उसका सर पूरा 180 डिग्री घूम गया था...
पूरी तरह से जला हुआ बिना आंखों का चेहरा...और वह बोलता है बाबूजी रास्ता तो अभी शुरू हुआ है...
श्याम बजरंगबली का भक्त था...वह अपनी जेब में हमेशा हनुमान चालीसा रखता था...उसने हनुमान चालीसा का जाप करना शुरू कर दिया...और हनुमान चालीसा को उसके ऊपर फेंका... तभी गाड़ी का बैलेंस बिगड़ा... और गाड़ी सीधे सड़क किनारे एक बड़े देवदार के पेड़ से जाकर टकरा गई...अगली सुबह जब कुछ स्थानी लोगों ने दुर्घटनाग्रस्त टैक्सी को देखा तो उन्होंने पुलिस को बुलाया...
पुलिस ने श्याम को बेहोशी की हालत में गाड़ी से बाहर निकाला...तो वह बुरी तरह ठंड से कांप पर रहा था...
श्याम के मुंह पर थोड़ा पानी मारा गया...उसके होश में आते ही पुलिस ऑफिसर ने श्याम से पूछा...बेटा तुम इस पुरानी कबाड़ टैक्सी में कैसे बैठे...यह टैक्सी तो 5 साल पहले इसी खाई में गिरी थी...और इसका ड्राइवर कभी नहीं मिला...
श्याम ने जब यह सुना तो उसे विश्वास नहीं हुआ...उसने उस टैक्सी को देखा तो वह सच में पूरी तरह से जंग खा चुकी थी... उसकी सिटें फटी हुई थी...और उस पर धूल जमा थी... जैसे वह सालों से वही लावारिस पड़ी हो...वह कबाड़ का डिब्बा बन चुकी थी...
श्याम ने मन ही मन बजरंगबली को धन्यवाद दिया...
लेकिन श्याम आज भी नैनीताल का नाम सुनते ही डर जाता है...
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