खैट पर्वत का रहस्य: क्या बबीता पांडे को "आछरी" ले गई ?
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😱💀रहस्यमई खैट पर्वत: आछरियों की सच्ची और खौफनाक कहानी
नैनीताल (रामनगर) की रहने वाली 24 साल की MBA छात्रा बबीता पांडे उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से 29 मई 2026 की रात से रहस्यमयी तरीके से लापता है।
प्रशासन की भारी भरकम टीमों (SDRF, NDRF, ITBP, सेना, ड्रोन और स्निफर डॉग्स) द्वारा एक महीने से ज्यादा समय तक चले बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
लेकिन स्थानीय लोगों में एक सुदबुदाहट है।
वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि उसे 'आछरी' ले गई
टिहरी के ही बगड़ गांव से जहां जीतू नाम का एक नौजवान लड़का रहता था।
जीतू अपनी बहन सोबनी को लेने उसके ससुराल जा रहा था।
रास्ते में वही रहस्यमय और डरावना खैट पर्वत पड़ता था।
दोपहर का वक्त था चारों तरफ सन्नाटा था, जीतू थक्कर एक बड़े पत्थर पर बैठ गया।
जीतू अपने पास बांसुरी रखता था, उस टाइम समय बिताने के लिए बांसुरी वगैरा ही टाइम पास के साधन हुआ करते थे।
उसने अपनी जेब से बांसुरी निकाली और और बजाने लगा ।
और जीतू भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।
कहते हैं उसे भी "आछरी" ले गई।
आखिर कौन है "आछरी"? क्या है पूरी कहानी! क्या है यह रहस्य।
तो चलिए जानने के लिए शुरू करते हैं। आज की खौफनाक कहानी😱😱💀
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देवभूमि उत्तराखंड में सिर्फ भगवान ही नहीं रहते बल्कि कुछ ऐसी अदृश्य शक्तियां भी रहती हैं, जिन्हें देखकर या जिनके बारे में जानकर अच्छे-अच्छे सूरमाओं के पसीने छूट जाते हैं।
ऐसा ही इलाका है "खैट पर्वत" जिसे "आछरियों"(परियों) का देश कहा जाता है।
सदियों पहले की बात है, टिहरी गढ़वाल के चौदाण गांव के राजा "आशा रावत" का राज हुआ करता था।
राजा के पास धन दौलत मान सम्मान सब कुछ था।
लेकिन साथ ही एक बहुत बड़ा दुख भी था।
राजा की छः रानियां थी, पर किसी से भी कोई संतान नहीं थी।
राजा इस बात से बहुत परेशान और चिंतित रहता था।
राजा की सबसे बड़ी रानी ने तब राजा को सलाह दी कि वह वंश आगे बढ़ाने के लिए सातवां विवाह कर लें।
संतान की चाह में राजा "आशा रावत" पास के "थात गांव" पहुंचा।
वहां उसकी मुलाकात बेहद खूबसूरत कन्या से हुई।
जिसका नाम देवा था। राजा ने देवा से सातवां विवाह कर लिया।
कुछ समय बाद रानी देवा के बच्चे हुए, लेकिन एक-एक करके रानी देवा ने
"9 बेटियों" को जन्म दिया।
लेकिन राजा को तो बेटा चाहिए था, इसलिए वह अपनी इन नो बेटियों और रानी देवा से बहुत नफरत करने लगा।
राजा की बाकी 6 रानियां भी रानी देवा और उसकी "9 बेटियों" से बहुत जलती थी और नफरत करती थीं।
एक बार राजा किसी दूसरे राज्य में किसी काम से बाहर गया हुआ था।
मौका देखकर बाकी 6 सौतेली माताओं ने एक भयानक साजिश को अन्जाम दिया।
उन्होने "नौ बहनों" से कहा तुम सब खैट पर्वत (जो उसे समय बेहद घना और डरावना जंगल था) पर जाओ, और वहां से हमारे लिए लकड़ियां और जड़ी बूटियां लेकर आओ।
मासूम बहने अपनी सौतेली मांओ की इस चाल को समझ नहीं पाई।
और खैट पर्वत की ऊंची पहाड़ियां की तरफ निकल गई।
वे "नौ बहने" जंगल में रास्ता भटक गई।
कई दिनों तक वें भूखी प्यासी खैट पर्वत पर भटकती रही।
और भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई।
और कहते हैं की तभी से वही 9 बहनें आज भी खैट पर्वत पर "आछरी" बनकर भटकती हैं।
और वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार तेज आवाज में गाने सुनना, तेज आवाज में बातें करना और चटख रंग के कपड़े पहनना यह सब आछरियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं है।
और यदि कोई ऐसी हिमाकत करता है, तो वह ऐसे ही रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता है।
मतलब उन्हें "आछरी" ले जाती हैं।
😱😱😱😱
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Disclaimer: यह कहानी इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और लोक कथाओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देने या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।
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