यह बात शिवरात्रि (15 फरवरी 2026, दिन:रविवार) की है । मेरा घर पहाड़ी इलाके सोनभद्र में स्थित है । मेरे घर से 1 किलोमीटर दूरी पर पहाड़ी पर एक बहुत पुराना भोले बाबा का गुफा मंदिर है, पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह बहुत वीराना रहता है ।पहाड़ी पर मंदिर के एक दो पुजारी के अलावा यहां कोई नहीं रहता, इक्का दुक्का लोग कभी कभार यहां दर्शन करने आ जाते हैं । लेकिन शिवरात्रि के दिन यहां हजारों भक्त मंदिर में भोले बाबा को जल चढ़ाने आते हैं ।
उस दिन (शिवरात्रि के दिन) सुबह 7:00 बजे मुझे बनारस निकलना था । इसलिए मैंने सोचा सुबह 4:00 बजे ही में मंदिर में जल चढ़ा आऊंगा क्योंकि सुबह 6:00 बजते ही वहां हजारों लोगों की भीड़ लगना शुरू हो जाएगी , और मुझे बनारस निकलने में बहुत देर हो जाएगी ।इसलिए मैं उस दिन 3:00 बजे उठकर नहा धोकर तैयार होकर लोटे में जल लेकर 4:00 बजे सुबह मंदिर के लिए निकल गया । पहाड़ी पर होने के कारण रास्ता जंगल से होते हुए जाता है ।
जाड़ों की सुबह 4:00 बजे तो सड़के भी वीरान पड़ी रहती हैं तो पहाड़ी की ओर जाने वाली जंगली रास्ते पर तो कौन ही दिखेगा । रास्ता एकदम सुनसान था भयानक काला अंधेरा था । कुछ कुत्तों और शियारों के रोने की आवाज़ें आ रही थी , उस जंगली रास्ते पर घने अंधेरे में यह आवाज़ मानो ऐसी महसूस हो रही थी जैसे मैं किसी बहुत ही डरावनी जगह पर पहुंच गया हूं ।
मैं भोला बाबा का नाम जपते हुए चला जा रहा था , तभी मैंने महसूस किया कि कोई मेरे पीछे चल रहा है । मैंने पीछे मुड़कर देखा तो एक शादीशुदा जोड़े में एकदम सजी-धजी कोई नव वधु मुंह पर पल्लू गिराये हुए मेरे पीछे आ रही है । यह देखकर मेरे शरीर में सिरहन सी दौड़ गई और मेरा दिल बहुत तेजी से धड़कने लगा , मेरा शरीर कांपने लगा । मेरे मन में विचार आ रहा था कि इस वीरान रास्ते पर इस अंधेरे में जहां कोई दिन में भी नहीं आता वहां एक नव वधू वह भी अकेले भला क्यों आएगी ।
मैंने देखा जो नववधू अभी मेरे पीछे चल रही थी , पलक झपकते ही वह अब मेरे आगे चलने लगी है । वह पलक झपकते ही कभी मेरे पीछे कभी आगे कभी बहुत दूर कभी बगल में दिखने लगी । यह देखते ही मेरे पैर मानो जम से गए हो , मेरा शरीर थर- थर कांप रहा था, इस जाड़े में भी मेरे पूरे शरीर से पसीना आ रहा था , मैं चीख भी नहीं पा रहा था मेरी आवाज मानो बंद हो गई थी ,मेरी आंखें फटी हुई थी , क्योंकि मेरी समझ में आ गया था कि यह कोई नववधू नहीं बल्कि यह तो कोई चुड़ैल या डायन है । तभी वह मेरे 20 कदम आगे जाकर रुक गई उसने मेरी और पीठ की हुई थी , अब वह अचानक मुड़ी और धीरे-धीरे मेरी तरफ चलने लगी , यह देखकर मेरी सांसे थमी जा रही थी मेरा दिल फटने को हो रहा था । तभी वह मेरे आगे बस तीन कदम की दूरी पर रुक गई । मुझे उसमें से सड़े हुए मांस की बहुत बदबूदार गंध आ रही थी ।
उसने अब अपना पल्लू अपने चेहरे पर से हटाया । उसका पूरा चेहरा जला हुआ था और सड़ भी रहा था उसमें से मांस टपक रहा था और खून टपक रहा था उसके बड़े-बड़े दांत बाहर निकले हुए थे । यह देखकर मेरी चीख निकल गई मैं बहुत जोर-जोर से चीखने लगा , वह मेरी और देखते हुए किसी कुत्ते की तरह बहुत जोर से घुर्रा रही थी । मेरे शरीर से जान बस निकलने को ही थी । वह मेरी और झपटी और मेरे हाथों से जल से भर लोटा नीचे जमीन पर गिर गया ।
और जब मेरी आंखें खुली तो मैंने पाया की मैं जीवित था और सही सलामत था और मैंने अपने आप को मंदिर के बगल में लेटा हुआ पाया सुबह के 6:00 बज चुके थे । हजारों की भीड़ लग चुकी थी लोग मंदिर में भोले बाबा को जल चढ़ा रहे थे । मैंने देखा बगल में मंदिर के पुजारी बाबा बैठे हुए थे , मैंने उनसे पूछा बाबा मैं यहां कैसे आया । बाबा ने मुझसे कहा कैसे आया का क्या मतलब है बेटा तुमने ही तो सबसे पहले बाबा को जल चढ़ाया है । जब मैं ( बाबा) मंदिर पर सुबह 4:30 बजे आया तो मैंने देखा बाबा को जल चढ़ा हुआ है और तुम यहां मंदिर के बगल में अपना लोटा लिए लेटे हुए देखो तुम्हारा लोटा भी तुम्हारे पास ही रखा हुआ है ।उन्होंने कहा आज तो बेटा तुमने मुझसे भी पहले बाबा को जल चढ़ा दिया ।
मेरी आंखों से आंसू बहने लगे , मुझे नहीं पता कि यह सब कैसे हुआ । मैंने भोले बाबा को नम आंखों से मन ही मन बहुत-बहुत धन्यवाद दिया और एक बार फिर लाइन में लगकर बाबा के दर्शन किए ।
जय बाबा महाकाल👏👏👏
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